भोपाल. मध्य प्रदेश में गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) के नाम पर ठगी के मामले में एक और रैकेट का खुलासा हुआ है. एसटीएफ (STF) ने वीआईपी सिम नंबर (VIP SIM Number) के रैकेट का पर्दाफाश करते हुए सरगना को गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी ने ही अमित शाह के नाम पर ठगी करने वाले डॉ. चंद्रेश शुक्ला को वीआईपी नंबर की सिम एक लाख रुपए में बेची थी. जबकि छह दिन की रिमांड पर चल रहे आरोपी से लगातार पूछताछ की जा रही है.

आरोपी करते थे ये काम

भोपाल के डेंटिस्ट डॉक्टर चंद्रेश शुक्ला ने खुद को कुलपति बनाने के लिए अपने साथी विंग कमांडर कुलदीप के साथ मिलकर राज्यपाल लालजी टंडन को फोन कर सिफारिश की थी. आरोपी कुलदीप ने खुद को गृह मंत्री अमित शाह बताया था. जबकि चंद्रेश ने फोन पर खुद को अमित शाह का पीए बताया था. यह फोन राज्यपाल को वीआईपी नंबर से किया गया था. हरिद्वार में रहने वाले ट्रैवल्स संचालक दक्ष अग्रवाल से चंद्रेश ने एक लाख रुपए में वीआईपी सिम नंबर खरीदा था. एसटीएफ दस जनवरी को आरोपी चंद्रेश शुक्ला और कुलदीप को गिरफ्तार कर चुकी है. जबकि तीसरी गिरफ्तारी दक्ष अग्रवाल की हुई है.


इंजीनियरिंग छोड़ गर्लफ्रेंड के साथ रह रहा था दक्ष

एसटीएफ एडीजी अशोक अवस्थी ने बताया कि आरोपी दक्ष अग्रवाल को हरिद्वार से गिरफ्तार किया गया. छह दिन की रिमांड लेकर उससे पूछताछ की जा रही है. पूछताछ में दक्ष ने वीआईपी सिम नंबर के रैकेट में शामिल होने की बात कबूली है. उन्होंने बताया कि आरोपी ने इस रैकेट के जरिए काफी पैसा कमाया और विदेश की यात्रा भी की. बताया जा रहा है कि देहरादून निवासी दक्ष अग्रवाल ने अपनी गर्लफ्रेंड के लिए 23 साल में इंजीनियरिंग की पढ़ाई को छोड़ दिया और उसके साथ हरिद्वार में रहने लगा. अब दक्ष की उम्र करीब 33 साल है. जबकि उसने इन दस सालों में कई लोगों को वीआईपी नंबर की सिम बेची हैं.

ट्रैवल्स एजेंसी की आड़ में चला रहा था रैकेट

एडीजी अशोक अवस्थी ने बताया कि वीआईपी नंबर की सिम के बारे में आरोपी दक्ष से पूछताछ की जा रही है. उसने कई लोगों को सिम बेची है और कई बड़े लोगों को ठगी का शिकार भी बनाया है. रैकेट का सरगना दक्ष अग्रवाल है और उसके इस रैकेट में कई टेलीकॉम के अधिकारी-कर्मचारियों के शामिल होने की आशंका है. आरोपी एक वीआईपी सिम एक लाख रुपए से लेकर इससे ज्यादा राशि में बेचता था. कहने को दक्ष हरिद्वार में ट्रैवल्स एजेंसी चलता था, लेकिन इसी की आड़ में वह वीआईपी नंबर के रैकेट का संचालन भी कर रहा था. दक्ष ने इसी साल वीआईपी नंबर के जरिए तेलंगाना के एक सांसद के साथ ठगी की थी. पुलिस ने उसे गिरफ्तार भी किया था, लेकिन जमानत पर बाहर आने के बाद आरोपी फिर से इस धंधे में कूद गया था.